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पाचन वह कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ है जिसमें à¤à¥‹à¤œà¤¨ को यांतà¥à¤°à¤¿â€à¤•ीय और रासायनिक रूप से छोटे छोटे घटकों में विà¤à¤¾à¤œà¤¿à¤¤ कर दिया जाता है ताकि उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ रकà¥à¤¤à¤§à¤¾à¤°à¤¾ में अवशोषित किया जा सके. पाचन à¤à¤• पà¥à¤°à¤•ार की अपचय कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ है: जिसमें आहार के बड़े अणà¥à¤“ं को छोटे-छोटे अणà¥à¤“ं में बदल दिया जाता है।
छोटी आंत मानव पाचन तंतà¥à¤° का à¤à¤• हिसà¥à¤¸à¤¾ है जहाठà¤à¥‹à¤œà¤¨ का पाचन होता है। यह जठरांतà¥à¤° संबंधी मारà¥à¤— में à¤à¤• अंग है जहां à¤à¥‹à¤œà¤¨ से अधिकांश पोषक ततà¥à¤µ और खनिज अवशोषण समापà¥à¤¤ हो जाता है। यह पेट और बड़ी आंत के बीच सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ है और अगà¥à¤¨à¤¾à¤¶à¤¯à¥€ नलिका के माधà¥à¤¯à¤® से पाचन में मदद करने के लिठपितà¥à¤¤ और अगà¥à¤¨à¤¾à¤¶à¤¯à¥€ रस को अवशोषित करता है।
सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¯à¥€ पà¥à¤°à¤¾à¤£à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ à¤à¥‹à¤œà¤¨ को मà¥à¤‚ह में लेकर उसे दांतों से चबाने के दौरान लार गà¥à¤°à¤‚थियों से निकलने वाले लार में मौजूद रसायनों के साथ रासायनिक पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ होने लगती है। यह à¤à¥‹à¤œà¤¨ फिर गà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¨à¤²à¥€ से होता हà¥à¤† उदर में जाता है, जहां हाइडà¥à¤°à¥‹à¤•à¥à¤²à¥‹à¤°à¤¿à¤• अमà¥à¤² सरà¥à¤µà¤¾à¤§à¤¿à¤• दूषित करने वाले सूकà¥à¤·à¥à¤®à¤¾à¤£à¥à¤“ं को मारकर à¤à¥‹à¤œà¤¨ के कà¥à¤› हिसà¥à¤¸à¥‡ का यांतà¥à¤°à¤¿â€à¤• विà¤à¤¾à¤œà¤¨ (जैसे, पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ का विकृतिकरण) और कà¥à¤› हिसà¥à¤¸à¥‡ का रासायनिक परिवरà¥à¤¤à¤¨ आरंठकरता है। हाइडà¥à¤°à¥‹à¤•à¥à¤²à¥‹à¤°à¤¿à¤• अमà¥à¤² का पीà¤à¤š (pH) मान कम होता है, जो कि किणà¥à¤µà¤•ों के लिये उतà¥à¤¤à¤® होता है। कà¥à¤› समय (आम तौर पर मनà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹à¤‚ में à¤à¤• या दो घंटे, कà¥à¤¤à¥à¤¤à¥‹à¤‚ में 5-6 घंटे और बिलà¥à¤²à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में इससे कà¥à¤› कम अवधि) के बाद à¤à¥‹à¤œà¤¨ के अवशेष छोटी आंत और बड़ी आंत से गà¥à¤œà¤¼à¤°à¤¤à¥‡ हैं और मलतà¥à¤¯à¤¾à¤— के दौरान बाहर निकाल दिठजाते हैं।
पाचन तंतà¥à¤°
पाचन तंतà¥à¤° कई पà¥à¤°à¤•ार के होते हैं। आंतरिक और बाहà¥à¤¯ पाचन में à¤à¤• बà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾à¤¦à¥€ अंतर होता है। बाहà¥à¤¯ पाचन का कà¥à¤°à¤® विकास सबसे पहले हà¥à¤† और अधिकांश कवक अब à¤à¥€ उस पर निरà¥à¤à¤° हैं। इस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में à¤à¤‚जाइमों को जीव के आसपास के वातावरण में सà¥à¤°à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ किया जाता है, जहां वे किसी कारà¥à¤¬à¤¨à¤¿à¤• पदारà¥à¤¥ को विà¤à¤¾à¤œà¤¿à¤¤ कर देते हैं और उसके शेष पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ में से कà¥à¤› हिसà¥à¤¸à¤¾ उस जीव में विसरित हो जाता है। बाद में जानवरों का कà¥à¤°à¤® विकास हà¥à¤† और उनमें आंतरिक पाचन विकसित हà¥à¤†, जो कि अधिक कारगर है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि विà¤à¤¾à¤œà¤¿à¤¤ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ का अधिक हिसà¥à¤¸à¤¾ खाया जा सकता है और रासायनिक वातावरण को अधिक पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ रूप से नियंतà¥à¤°à¤¿â€à¤¤ किया जा सकता है।
लगà¤à¤— सà¤à¥€ पà¥à¤°à¤•ार की मकड़ियों सहित कà¥à¤› जीव केवल जैव-विष और पाचक रसायनों (उदाहरण के लिà¤, à¤à¤‚जाइम) को बहिरà¥à¤•ोशिकीय वातावरण में सà¥à¤°à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कर देते हैं और फिर उस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ से उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ "शोरबे" को गटक लेते हैं। कà¥à¤› अनà¥à¤¯ जीवों में, संà¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ या à¤à¥‹à¤œà¤¨ के जीव के à¤à¥€à¤¤à¤° जाने के बाद à¤à¤• पà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ा या à¤à¤• थैलीनà¥à¤®à¤¾ संरचना में, à¤à¤• नली, या पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ के अवशोषण को अधिक कारगर बनाने वाले विशिषà¥à¤Ÿ अवयवों के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ पाचन कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ चलती रहती है।
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